क्यों नहीं जागरूक हो रहे भारतीय मतदाता इस मुद्दे पर लोगों की अलग-अलग राय जानने का मौका मेरे दुआरा चलाये गए मतदाता जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से मिला जिसमे लोगो के अनुसार अलग-अलग राय है और कुछ लोग तो इस मुद्दे पर एक-दूसरे से बिलकुल उलट सोच भी रखते हैं।
देश के मतदाताओं की निर्णय क्षमता और मतदान के वक्त उनकी विवेक शक्ति पर भरोसा करने वाले वर्ग का मानना है कि आज आजादी के बाद के हालात नहीं हैं तथा मतदाता अपने लाभ-हानि, देश और समाज के हित सहित विकास के मुद्दों को अच्छी तरह समझने लगा है। यही कारण है कि कोई भी राजनीतिक दल उन्हें मूर्ख बना कर उनका वोट नहीं हथिया सकता है। यदि किसी राजनीतिक दल को सत्ता में रहना है तो उसे विकास की राजनीति करनी होगी अन्यथा मतदाता उसे नकार देगा I
इसके ठीक विपरीत ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जो ये मानते हैं कि आज भी देश में मतदाता मतदान के वक्त जाति, मजहब, क्षेत्र, नातेदारी आदि को तवज्जो देता है तथा छोटे-छोटे लाभ के लालच में अपना भविष्य भरमाने वाले राजनीतिज्ञों के पास गिरवी रख देता है। राजनीतिक दल शराब, पैसा, बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त साइकिल, सस्ते राशन आदि का प्रलोभन देकर मतदान को बड़ी आसानी से अपने पक्ष में करवा लेते हैं। इसलिए ये कहना बेमानी है कि मतदाता जागरुक हो चुका है और वह अपना मत विकास और राष्ट्रहित के आधार पर देता है।
देश के मतदाताओं की निर्णय क्षमता और मतदान के वक्त उनकी विवेक शक्ति पर भरोसा करने वाले वर्ग का मानना है कि आज आजादी के बाद के हालात नहीं हैं तथा मतदाता अपने लाभ-हानि, देश और समाज के हित सहित विकास के मुद्दों को अच्छी तरह समझने लगा है। यही कारण है कि कोई भी राजनीतिक दल उन्हें मूर्ख बना कर उनका वोट नहीं हथिया सकता है। यदि किसी राजनीतिक दल को सत्ता में रहना है तो उसे विकास की राजनीति करनी होगी अन्यथा मतदाता उसे नकार देगा I
इसके ठीक विपरीत ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जो ये मानते हैं कि आज भी देश में मतदाता मतदान के वक्त जाति, मजहब, क्षेत्र, नातेदारी आदि को तवज्जो देता है तथा छोटे-छोटे लाभ के लालच में अपना भविष्य भरमाने वाले राजनीतिज्ञों के पास गिरवी रख देता है। राजनीतिक दल शराब, पैसा, बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त साइकिल, सस्ते राशन आदि का प्रलोभन देकर मतदान को बड़ी आसानी से अपने पक्ष में करवा लेते हैं। इसलिए ये कहना बेमानी है कि मतदाता जागरुक हो चुका है और वह अपना मत विकास और राष्ट्रहित के आधार पर देता है।
उपरोक्त के आधार पर कुछ ऐसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील सवाल सामने आते हैं जिन पर बहस होनी ही चाहिए, जैसे:
1. क्या आज की परिस्थिति में भारतीय मतदाताओं को अपने मत मूल्य की पहचान हो चुकी है?
2. क्या भारतीय मतदाता आज भी क्षुद्र स्वार्थों के लालच में आकर मतदान करते हैं?
3. मतदाताओं के व्यवहार को देखते हुए यह कहना कहां तक सही होगा कि भारत का लोकतंत्र परिपक्व लोकतंत्र है?
4. मतदाता को जागरुक करने के लिए कौन से उपाय अपनाए जाने चाहिए?

